Posts

कोलियवंश के पृथ्वी सम्राट श्री मान्धाता

Image
हमारे प्राचीन राजा मान्धाता की कथा: सूर्यवंशी क्षत्रिय कोलियवंश   की उत्पत्ति हमारे प्राचीन राजा मान्धाता(Mandhata) की कथा, मोहनजो दारो के पुरातात्विक निष्कर्ष 5000-3000 ईसा पूर्व के हैं। वहां के पत्थर के शिलालेखों में उनके राज्यों में महान कोली राजाओं और प्रशासन की उनकी पंचायती पद्धति का वर्णन है। महान राजा मान्धाता के संदर्भ में कई बार और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं, वीरता, और यज्ञ के कई प्रकाशनों में वर्णित हैं। इक्ष्वाकु सूर्यवंश: राजा मान्धाता के बारे मे अनुमान है कि वे लगभग दस हजार साल पहले जीवित थे। उसके बाद श्री राम, श्री कृष्ण और भगवान बुद्ध जैसी महान आत्माओं का जन्म हुआ। फिर भी राजा मान्धाता की उपलब्धियों की महानता ऐसी थी कि एक सांसारिक भाषाप्रकार इस दिन सार्वभौमिक उपयोग में आया, जब दूसरों से यह पूछने की तुलना की गई  की क्या वह मान्धाता(Mandhata) की तरह महान थे? ’मंधाता की तुलना सूर्यवंश में सबसे चमकीले तारे के रूप में की गई है और उनका जन्म हुआ था ब्रह्मा की 15 वीं पीढ़ी में। महान मनु के बाद 10 वीं पीढ़ी में  मान्धाता(Mandhata) हुये थे। मन्धाता के बा...

महाराजगंज कोलियो का साम्राज्य

महाकाव्य - काल में यह क्षेत्र कारपथ के रूप में जाना जाता था, जो कोशल राज्य का एक अंग था। ऐसा प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र पर राज्य करने वाले प्राचीनतम सम्राट इक्ष्वाकु थे, जिनकी राजधानी अयोध्या थी। इक्ष्वाकु के उपरान्त इस राजवंश को अनेक छोटे-छोटे राज्यों में बांट दिया और अपने पुत्र कुष को कुषावती का राजा बनाया, जिसकी आधुनिक समता कुशीनगर के साथ स्थापित की जाती है। राम के संसार त्याग के उपरान्त कुष ने कुषावती का परित्याग कर दिया और अयोध्या लौट गये। बाल्मीकि रामायण से ज्ञात होता कि मल्ल उपाधिकारी लक्ष्मण पुत्र चन्द्रकेतु ने इसके उपरान्त इस सम्पूर्ण क्षेत्र के शासन सूत्र का संचालन करना प्रारम्भ किया। महाभारत में वर्णित है कि युधिष्ठिर द्वारा सम्पादित राजसूय यज्ञ के अवसर पर भीमसेन को पूर्ववर्ती क्षेत्रों को विजित करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया था। फलतः भीमसेन ने गोपालक नामक राज्य को जीत लिया। जिसके बांसगांव स्थित गोपालपुर के साथ स्वीकृत किया जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि वर्तमान महराजगंज जनपद का दक्षिण भाग निष्चित रूप से भीमसेन की इस विजय यात्रा से प्रभावित हुआ होगा। महाभारत के युग के उपरा...

दक्षिण भारत के (कोलिय) चोल साम्राज्य के संस्थापक राजा राजेन्द्र चोल

Image
दक्षिण भारत   चोलवंश के ( कोलिय) संस्थापक  राजा राजेंद्र चोल  विश्व विजेता राजेंद्र चोल सन 1012 से 1044 ईसवी तक भारत भूमि को संभाला यह दक्षिण भारत के राजा थे। विश्व विजेता राजेंद्र चोल को इतिहास के पन्नों में ही गुम कर दिया है। जो संपूर्ण विश्व को आर्य बना देंगे तीनों लोकों में आर्यों की सत्ता कायम कर देंगे। और bhagave की गूंज से देवताओं को प्रसन्न करेंगे। राजेंद्र चोल ने अपनी जीत की शुरुआत बिहार और बंगाल के पाल राजाओं को हराकर की गंगा नदी से खुद को आर्य सम्राट घोषित करते हुए। गंगे गोंड की उपाधि धारण कर ली इन की राजधानी चोल पुरम में भव्य शिव मंदिर बनवा के ब्राह्मणों के आशीर्वाद से यह विश्व विजय अभियान पर निकल पड़े उन्होंने अंडमान निकोबार श्रीलंका मालदीव मलेशिया। थाईलैंड इंडोनेशिया में अपनी जीत का भगवा लहराया। दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक तमिलनाडु से लेकर इंडोनेशिया तक के राज्य के महाराजाधिराज राजेंद्र चोल ने सनातन धर्म का बहुत तेजी से विस्तार किया। नमन कीजिए इस वीर क्षत्रिय राजपूत योद्धा को, यह कैसा जिसने संपूर्ण श्रीलंका को चीरते हुए आज के इंडोनेशिया, मलेशिया,...

चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य

Image
कोलिय- शाक्य वंश की शाखा मौर्य    चक्रवर्ती सम्राट अशोक मौर्य  (ईसा पूर्व ३०४ से ईसा पूर्व २३२) विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय राजवंश के महान सम्राट थे। सम्राट अशोक का पूरा नाम #देवानांप्रिय अशोक  (राजा प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय) था। उनका राजकाल ईसा पूर्व २६९ से २३२ प्राचीन भारत में था। इस राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने अखंड भारत पर राज्य किया है तथा उनका  साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से पश्चिम में अफ़ग़ानिस्तान, ईरान तक पहुँच गया था। सम्राट अशोक का साम्राज्य आज का संपूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यान्मार के अधिकांश भूभाग पर था, यह विशाल साम्राज्य उस समय तक से आज तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य रहा है। चक्रवर्ती सम्राट अशोक विश्व के सभी महान एवं शक्तिशाली सम्राटों एवं राजाओं की पंक्तियों में हमेशा शिर्ष स्थान पर ही रहे हैं। सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट है। सम्राट अशोक को ‘चक्रवर्ती सम...

सुर्यवंशी क्षत्रिय कोलिय, मोर्या, शाक्य, कुशवाहा समाज

सूर्यवंशी क्षत्रिय,शाक्य ,कोलिय ,मोर्य, भाईओ समाज की बागडोर उसको संभलानी चाहिए जिसको अपने वशं इतिहास की पूर्ण जानकारी हो नहीं तो वह शुध्द रक्त के क्षत्रिय शाक्य ,कुशवहा , मोर्य ,कोलिय ,सूर्यवशी क्षत्रियो की लुटिया मे डुबा देगा यानि वशं  का इतिहास ही खत्म कर देगा जैसे आज के समय मे हो रहा है  इसलिये भाईयों समाज का नेतृत्व सही इतिहासकार के पास होना चाहिए जो इन्सान राजनीति करने के चक्कर मे हो वह इन्सान कभी समाज का उध्दार/भला  नही कर सकता है आज समय  मे अपना समाज कई जगह भटका हुआ है  वह अपना वशं छोडकर दूसरे वशं मे बट रहे है उनको एक जगह लाने की कोशिश करनी चाहिए ओर उनको यह भी बताना चाहिए कि भाईओ आप का इतिहास एवं वंशावली यह है जिससे अपने समाज को अपने वशं इतिहास की असली जानकारी हो सके  ओर अपना समाज आगे बढ़ सके ओर दूसरों को जबाव दे सके कि हमारा वशं यह है ओर हमारी जाति यह हैं सबसे पहले अपने समाज को इतिहास ओर वंशावली से अवगत कराना बहुत जरुरी है  जिससे आने बाली पीढ़ी को माता पिता अपने बच्चों को अपने इतिहास के बारे मे जानकारी दे सके जब माता पिता को अपने वशं इतिहास की जा...

मौर्य क्षत्रिय राजपूत वंश Maurya Kshatriya Rajput Dynasty

Image
सूर्यवंशी मौर्य क्षत्रिय राजपूत वंश की गौरव गाथा------- मौर्य वंश से जुडी भ्रांतियों का तर्कपूर्ण खण्डन टीम rajputana soch राजपूताना सोच और क्षत्रिय इतिहास द्वारा, जरूर पढ़ें और अधिक से अधिक शेयर भी करें।। ================================ मौर्यो के रघुवंशी क्षत्रिय होने के प्रमाण-------- महात्मा बुध का वंश शाक्य गौतम वंश था जो सूर्यवंशी क्षत्रिय थे।कौशल नरेश प्रसेनजित के पुत्र विभग्ग ने शाक्य क्षत्रियो पर हमला किया उसके बाद इनकी एक शाखा पिप्लिवन में जाकर रहने लगी। वहां मोर पक्षी की अधिकता के कारण मोरिय कहलाने लगी। बौद्ध रचनाओं में कहा गया है कि ‘नंदिन’(नंदवंश) के कुल का कोई पता नहीं चलता (अनात कुल) और चंद्रगुप्त को असंदिग्ध रूप से अभिजात कुल का बताया गया है। चंद्रगुप्त के बारे में कहा गया है कि वह मोरिय नामक क्षत्रिय जाति की संतान था; मोरिय जाति शाक्यों की उस उच्च तथा पवित्र जाति की एक शाखा थी, जिसमें महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था। कथा के अनुसार, जब अत्याचारी कोसल नरेश विडूडभ ने शाक्यों पर आक्रमण किया तब मोरिय अपनी मूल बिरादरी से अलग हो गए और उन्होंने हिमालय के एक सुरक्षित स्...

अधिकार न्याय मोर्चा के तत्वधान में रामजन्मभूमी पूजन कार्यक्रम। जिसमें प्रमुख रूप से मराठा, राजपूत, कोलिय राजपूत, अर्कवंशी राजवंशी, खंगार, राजू, रोहिल्ला आदि को सादर आमंत्रित किया गया है!

Image
राष्ट्रीय क्षत्रिय जनसंसद संघ का बङा ऐलान    अधिकार न्याय मोर्चा के तत्वधान में रामजन्मभूमी पूजन कार्यक्रम। जिसमें प्रमुख रूप से मराठा, राजपूत, कोलिय राजपूत, अर्कवंशी राजवंशी, खंगार, राजू, रोहिल्ला आदि को  सादर आमंत्रित किया गया है! क्षत्रिय अधिकार न्याय मोर्चा में दादा ठाकुर विजय सिंह उप-सभापति है। और क्षत्रिय जनसंसद में गवर्निंग काउंसिल में स्थाई सदस्य है। ये समस्त क्षत्रिय कोलीयो के लिए सम्मान की बात है हम क्षत्रिय जनसंसद ओर क्षत्रिय अधिकार न्याय मोर्चा में प्रमुख भूमिका निभा रहे है। #RamMandir