दक्षिण भारत के (कोलिय) चोल साम्राज्य के संस्थापक राजा राजेन्द्र चोल
राजा राजेंद्र चोल
विश्व विजेता राजेंद्र चोल सन 1012 से 1044 ईसवी तक भारत भूमि को संभाला यह दक्षिण भारत के राजा थे। विश्व विजेता राजेंद्र चोल को इतिहास के पन्नों में ही गुम कर दिया है। जो संपूर्ण विश्व को आर्य बना देंगे तीनों लोकों में आर्यों की सत्ता कायम कर देंगे। और bhagave की गूंज से देवताओं को प्रसन्न करेंगे। राजेंद्र चोल ने अपनी जीत की शुरुआत बिहार और बंगाल के पाल राजाओं को हराकर की गंगा नदी से खुद को आर्य सम्राट घोषित करते हुए।
गंगे गोंड की उपाधि धारण कर ली इन की राजधानी चोल पुरम में भव्य शिव मंदिर बनवा के ब्राह्मणों के आशीर्वाद से यह विश्व विजय अभियान पर निकल पड़े उन्होंने अंडमान निकोबार श्रीलंका मालदीव मलेशिया। थाईलैंड इंडोनेशिया में अपनी जीत का भगवा लहराया। दक्षिण भारत के केरल कर्नाटक तमिलनाडु से लेकर इंडोनेशिया तक के राज्य के महाराजाधिराज राजेंद्र चोल ने सनातन धर्म का बहुत तेजी से विस्तार किया।
नमन कीजिए इस वीर क्षत्रिय राजपूत योद्धा को, यह कैसा जिसने संपूर्ण श्रीलंका को चीरते हुए आज के इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड को अपने राज्य में मिला कर संपूर्ण हिंद महासागर पर कब्जा कर लिया। और अपनी नौसेना तैयार करवाई उनकी नौसेना अब तीनों साग्रो हिंदू, सिंधु और गंगा सागर में स्वच्छंद रूप से विचरण करने लगी। भारत की नौसेना इन को अपना हीरो मानती है।।
जय माँ भवानी जय क्षात्र धर्म🙏
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