सुर्यवंशी क्षत्रिय कोलिय कुल से श्री मान्धाता महाराजा
सूर्यवंश/इक्ष्वाकुवंश/अर्कवंश/रघुवंश पुराणों के अनुसार प्राचीन भारतवर्ष के भगवान श्री राम इसी कुल मे अवतरित हुए थे । ऐतिहासिक दृष्टि से सूर्यवंश, सत्य, चरित्र, वचनपालन, त्याग, तप व शौर्य का प्रतीक रहा है । भगवान सूर्य के परम तेजस्वी पुत्र वैवस्वत मनु से प्रारम्भ हुआ यह वंश सूर्यवंश कहलाता है । पुराणों वेदों ग्रंथो में भगवान सूर्य के पुत्र को 'अर्क तनय' नाम से सम्बोधित किया गया है । इन्हीं वैवस्वत मनु के पुत्र इक्ष्वाकु से सूर्यवंश का विस्तार हुआ था । अतः सूर्यवंश को इक्ष्वाकुवंश भी कहा जाता है । अयोध्या के सूर्यवंश (इक्ष्वाकुवंश) में रघु नामक राजा हुये थे । उन्हीं सम्राट रघु का वंश रघुवंश या रघुकुल कहलाता है । इस प्रकार यह एकमात्र ऐसा क्षत्रिय वंश है जो सूर्यवंश, इक्ष्वाकुवंश व रघुवंश इन तीनों नामों से जाना जाता है । कालांतर में इसी वंश में भगवान बुद्ध ,महावीर का प्रादुर्भाव हुआ । सुर्यवंशी क्षत्रिय कोली/कोलिय कुल महान पृथ्वीपति महाराजा मान्धाता इस वंश मे हुआ था ।
जय सुर्यवंशी क्षत्रिय कोलिय राजवंश के इष्टदेव भगवान् श्री मान्धता महाराजा की
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